📘 Chapter 3
Sustainable Development
Topic 3.1: Meaning and Principles of Sustainable Development
सतत विकास का अर्थ और मूल सिद्धांत

सतत विकास का अर्थ

सतत विकास का अर्थ है—
प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग इस प्रकार करना कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी हों और साथ ही भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतें पूरी करने की क्षमता भी बनी रहे।

सरल शब्दों में:

  • विकास + पर्यावरण संरक्षण

  • आर्थिक प्रगति + सामाजिक कल्याण

  • वर्तमान और भविष्य के संसाधनों का संतुलन

सतत विकास दीर्घकालिक, संतुलित और प्रकृति-हितैषी विकास है।


सतत विकास के मूल सिद्धांत

1. संसाधनों का संरक्षण

जल, मिट्टी, वन, खनिज आदि प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं सीमित उपयोग।

2. विकास और पर्यावरण का संतुलन

ऐसा विकास जो पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए; उद्योगों द्वारा पर्यावरण-हितैषी तकनीक का उपयोग।

3. पीढ़ियों के बीच समानता (Intergenerational Equity)

भविष्य की पीढ़ियों को भी उतने ही संसाधन उपलब्ध कराना जितने आज हमारे पास हैं।

4. नवीकरणीय संसाधनों का उपयोग

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन को कम करना।

5. अपशिष्ट में कमी (Waste Reduction)

कचरा कम करना, पुनर्चक्रण (Recycle) करना और प्रदूषण नियंत्रित करना।

6. सामाजिक विकास

स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ जल, स्वच्छता आदि सुविधाएँ सभी को उपलब्ध कराना।

7. सभी की भागीदारी

सरकार, समाज और प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर सतत विकास के लिए योगदान करना चाहिए।

Posted by: Er. Manoj Kumar
Post Date: 16-11-2025 01:23 PM