📘 Chapter 1
Introduction to Database Management System
Topic 1.8: Relational Data Model
रिलेशनल डेटा मॉडल

रिलेशनल डेटा मॉडल का अर्थ

  • रिलेशनल डेटा मॉडल वह डाटाबेस मॉडल है जिसमें डेटा को तालिकाओं (Tables) के रूप में संग्रहित किया जाता है।

  • प्रत्येक तालिका में पंक्तियाँ (रिकॉर्ड) और स्तंभ (फील्ड) होते हैं।

  • सामान्य फील्ड के माध्यम से तालिकाओं के बीच संबंध स्थापित किए जाते हैं।

रिलेशनल डेटा मॉडल की उत्पत्ति

  • रिलेशनल डेटा मॉडल को E. F. Codd ने 1970 में प्रस्तावित किया था।

  • यह आज का सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला और लोकप्रिय डाटाबेस मॉडल है।

रिलेशनल डेटा मॉडल की संरचना

  • टेबल – डेटा को पंक्तियों और स्तंभों में संग्रहित करती है।

  • रिकॉर्ड (पंक्ति) – तालिका में एक पूर्ण प्रविष्टि को दर्शाता है।

  • फील्ड (स्तंभ) – डेटा की विशेषता को दर्शाता है।

  • कुंजी (Key) – रिकॉर्ड की पहचान और तालिकाओं के बीच संबंध बनाने के लिए उपयोग होती है।

रिलेशनल डेटा मॉडल की कार्यप्रणाली

  • डेटा को एक बड़ी तालिका में रखने के बजाय कई संबंधित तालिकाओं में रखा जाता है।

  • प्राथमिक कुंजी (Primary Key) और विदेशी कुंजी (Foreign Key) का उपयोग करके संबंध बनाए जाते हैं।

  • एक तालिका में किए गए बदलाव से संबंधित तालिकाओं में डेटा की संगति बनी रहती है।

रिलेशनल डेटा मॉडल का उदाहरण

  • Student Table में रोल नंबर, नाम और कक्षा होती है।

  • Marks Table में अंकों का विवरण और रोल नंबर होता है।

  • रोल नंबर दोनों तालिकाओं को जोड़ने वाला सामान्य फील्ड होता है।

रिलेशनल डेटा मॉडल के लाभ

  • सरल और समझने में आसान।

  • डेटा दोहराव कम करता है।

  • डेटा की संगति और अखंडता बनाए रखता है।

  • लचीला और संशोधित करने में आसान।

  • डेटा को खोजने और निकालने में शक्तिशाली।

Posted by: Er. Manoj Kumar
Post Date: 22-12-2025 04:32 PM